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mahabharat 2.44.d40: भगवान ने अपने चक्र से मुर नामक राक्षस के पाश को काटकर, उसके वंश सहित मुर नामक राक्षस को मार डाला। उन्होंने चट्टानों के समूह पर कूदकर निशुम्भ का भी वध कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d40
 
 
श्लोक  2.44.d40 
संच्छिद्य पाशांस्त्वस्त्रेण मुरं हत्वा सहान्वयम्॥
शिलासङ्घानतिक्रम्य निशुम्भमवपोथयत्।
 
 
अनुवाद
भगवान ने अपने चक्र से मुर नामक राक्षस के पाश को काटकर, उसके वंश सहित मुर नामक राक्षस को मार डाला। उन्होंने चट्टानों के समूह पर कूदकर निशुम्भ का भी वध कर दिया।
 
By cutting the noose of the demon Mur with his weapon (Chakra), the Lord killed the demon named Mur along with his descendants. He also killed Nisumbha by jumping over the groups of rocks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)