Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.44.d30-d31: प्रेतात्मा इन्द्र ने वसुदेव, उद्धव, महामती विकद्रु, प्रद्युम्न, साम्ब, निषथ, अनिरुद्ध, सात्यकि, गद, सारण, अक्रूर, कृतवर्मा, चारुदेष्ण और सुदेष्ण आदि अन्य यादवों को यथोचित रीति से गले लगाया और उन सभी की ओर देखा। | mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उद्धवं वसुदेवं च विकद्रुं च महामतिम्।
प्रद्युम्नसाम्बनिशठाननिरुद्धं ससात्यकिम्॥
गदं सारणमक्रूरं कृतवर्माणमेव च।
चारुदेष्णं सुदेष्णं च अन्यानपि यथोचितम्॥
परिष्वज्य च दृष्ट्वा च भगवान् भूतभावन:।
अनुवाद
प्रेतात्मा इन्द्र ने वसुदेव, उद्धव, महामती विकद्रु, प्रद्युम्न, साम्ब, निषथ, अनिरुद्ध, सात्यकि, गद, सारण, अक्रूर, कृतवर्मा, चारुदेष्ण और सुदेष्ण आदि अन्य यादवों को यथोचित रीति से गले लगाया और उन सभी की ओर देखा।
Indra, having the ghostly spirit, embraced Vasudev, Uddhava, Mahamati Vikadru, Pradyumna, Samba, Nishath, Aniruddha, Satyaki, Gad, Saran, Akrur, Kritavarma, Charudeshna and Sudeshna etc. and other Yadavas in a proper manner and looked at them all.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥