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mahabharat 2.44.d17: उनका जन्म देवी पृथ्वी से हुआ था, प्राग्ज्योतिषपुर उनकी राजधानी थी और चार युद्धरत राक्षस उनके राज्य की सीमाओं की रक्षा करते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d17
 
 
श्लोक  2.44.d17 
यं मही सुषुवे देवी यस्य प्राग्ज्योतिषं पुरम्।
विषयान्तपालाश्चत्वारो यस्यासन् युद्धदुर्मदा:॥
 
 
अनुवाद
उनका जन्म देवी पृथ्वी से हुआ था, प्राग्ज्योतिषपुर उनकी राजधानी थी और चार युद्धरत राक्षस उनके राज्य की सीमाओं की रक्षा करते थे।
 
He was born from Goddess Earth, Pragjyotishpur was his capital and four war-fighting demons protected the borders of his kingdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)