Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.44.d16: अतीत में सभी महान राक्षसों ने मिलकर भी इतना गंभीर पाप नहीं किया था जितना इस महान राक्षस ने अकेले किया था।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d16
 
 
श्लोक  2.44.d16 
न चासुरगणै: सर्वै: सहितै: कर्म तत् पुरा।
कृतपूर्वं महाघोरं यदकार्षीन्महासुर:॥
 
 
अनुवाद
अतीत में सभी महान राक्षसों ने मिलकर भी इतना गंभीर पाप नहीं किया था जितना इस महान राक्षस ने अकेले किया था।
 
In the past, even all the great demons together did not commit such a grave sin as this great demon alone committed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)