Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.44.d113: देवी माँ की सारी चिंताएँ दूर हो गईं। श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने की इच्छा से उन्होंने सत्यभामा को उत्तम वर प्रदान किया।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d113
 
 
श्लोक  2.44.d113 
सा तस्या: सत्यभामाया: कृष्णप्रियचिकीर्षया॥
वरं प्रादाद् देवमाता सत्यायै विगतज्वरा।
 
 
अनुवाद
देवी माँ की सारी चिंताएँ दूर हो गईं। श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने की इच्छा से उन्होंने सत्यभामा को उत्तम वर प्रदान किया।
 
All the worries of the Mother Goddess had gone away. With the desire to please Shri Krishna, he provided the best groom to Satyabhama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)