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mahabharat 2.43.d9: हे निष्पाप युधिष्ठिर! वहाँ श्रीकृष्ण अपने ही आयु के अन्य ग्वालबालों के साथ बछड़े चराते, दिन भर खेल खेलते और वन में उसी प्रकार सुखपूर्वक दिन बिताते, जैसे पहले दिव्य धाम में आनन्द मनाते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d9
 
 
श्लोक  2.43.d9 
स तत्र वयसा तुल्यै: वत्सपालै: सहानघ।
रेमे स दिवसान् कृष्ण: पुरा स्वर्गपुरे तथा॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप युधिष्ठिर! वहाँ श्रीकृष्ण अपने ही आयु के अन्य ग्वालबालों के साथ बछड़े चराते, दिन भर खेल खेलते और वन में उसी प्रकार सुखपूर्वक दिन बिताते, जैसे पहले दिव्य धाम में आनन्द मनाते थे।
 
Sinless Yudhishthira! There, Shri Krishna used to graze calves with other cowherd boys of the same age, play games all day long and spend his days happily in the forest just as he used to enjoy himself in the divine abode earlier.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)