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mahabharat 2.43.d8: भ्रमण करते समय महात्मा भगवान केशव ने भण्डीर नामक एक वट वृक्ष देखा और उसकी छाया में बैठने का निश्चय किया।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  2.43.d8 
भाण्डीरं नाम दृष्ट्वाथ न्यग्रोधं केशवो महान्।
तच्छायायां निवासाय मतिं चक्रे तदा प्रभु:॥
 
 
अनुवाद
भ्रमण करते समय महात्मा भगवान केशव ने भण्डीर नामक एक वट वृक्ष देखा और उसकी छाया में बैठने का निश्चय किया।
 
While wandering, Mahatma Bhagwan Keshav saw a banyan tree named Bhandeer and decided to sit in its shade.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)