Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.43.d66: हे भरत! जिस प्रकार वायु बड़े-बड़े बादलों को छिन्न-भिन्न कर देती है, उसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने इन्द्र के रथ पर बैठकर कंस की उपरोक्त समस्त सेनाओं का नाश कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d66
 
 
श्लोक  2.43.d66 
एष शक्ररथे तिष्ठंस्तान्यनीकानि भारत॥
व्यधमद् भोजपुत्रस्य महाभ्राणीव मारुत:।
 
 
अनुवाद
हे भरत! जिस प्रकार वायु बड़े-बड़े बादलों को छिन्न-भिन्न कर देती है, उसी प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने इन्द्र के रथ पर बैठकर कंस की उपरोक्त समस्त सेनाओं का नाश कर दिया।
 
Bharata! Just as the wind breaks up huge clouds, in the same way Lord Krishna, sitting in Indra's chariot, destroyed all the above mentioned armies of Kansa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)