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mahabharat 2.43.d57: युधिष्ठिर! भोजराज कंस के पास आभूषणों से सुसज्जित तेज चलने वाले हाथियों की एक विशाल सेना थी, जो हाथियों की सेना से दुगुनी थी।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d57
 
 
श्लोक  2.43.d57 
स्वलङ्कृतानां शीघ्राणां करेणूनां युधिष्ठिर।
अभवद् भोजराजस्य द्विस्तावद्धि महद् बलम्॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! भोजराज कंस के पास आभूषणों से सुसज्जित तेज चलने वाले हाथियों की एक विशाल सेना थी, जो हाथियों की सेना से दुगुनी थी।
 
Yudhishthira! Bhojraj Kansa had a huge army of swift elephants decked with ornaments that was twice the size of the army of elephants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)