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mahabharat 2.43.d55: युधिष्ठिर! कंस के पास केवल आठ लाख हाथी सवार थे जो युद्ध से कभी पीछे नहीं हटते थे। उनके हाथियों की पीठ पर चमकदार सुनहरे हौदे बंधे होते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d55
 
 
श्लोक  2.43.d55 
स्फुरत्काञ्चनकक्ष्यास्तु गजास्तस्य युधिष्ठिर॥
तावन्त्येव सहस्राणि गजानामनिवर्तिनाम्।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! कंस के पास केवल आठ लाख हाथी सवार थे जो युद्ध से कभी पीछे नहीं हटते थे। उनके हाथियों की पीठ पर चमकदार सुनहरे हौदे बंधे होते थे।
 
Yudhishthira! Kansa had only 8 lakh elephant riders who never backed down from a war. Their elephants had shiny golden howdahs tied on their backs.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)