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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d53
 
 
श्लोक  2.43.d53 
चित्रकार्मुकनिस्त्रिंशविमलप्रासयोधिन:॥
शतं शतसहस्राणि पादातास्तस्य भारत।
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! उनके पास एक करोड़ पैदल सैनिक थे जो धनुष, तलवार और चमकते भालों से विचित्र तरीकों से युद्ध करते थे।
 
Bharatanandan! He had ten million infantry soldiers who fought in strange ways with bows, swords and gleaming spears.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)