Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.43.d52: भोज वंश के राजकुमार कंस, जिसने भोज वंश के राज्य का विस्तार किया था, से संसार के सभी राजा उसी प्रकार चिंतित थे, जिस प्रकार एक सर्प गरुड़ से चिंतित रहता है।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d52
 
 
श्लोक  2.43.d52 
तस्य भोजपते: पुत्राद् भोजराज्यविवर्धनात्॥
उद्विजन्ते स्म राजान: सुपर्णादिव पन्नगा:।
 
 
अनुवाद
भोज वंश के राजकुमार कंस, जिसने भोज वंश के राज्य का विस्तार किया था, से संसार के सभी राजा उसी प्रकार चिंतित थे, जिस प्रकार एक सर्प गरुड़ से चिंतित रहता है।
 
All the kings of the world were worried about Kansa, the prince of Bhoj dynasty, who expanded the kingdom of the Bhoj dynasty, in the same way as a snake is worried about Garuda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)