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mahabharat 2.43.d51: हे पितामह युधिष्ठिर! भोज का राजकुमार कंस भी अस्त्र-शस्त्र, बल और पराक्रम के ज्ञान में महाबली अर्जुन के समान था।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d51
 
 
श्लोक  2.43.d51 
भोजराजतनूजोऽपि कंसस्तात युधिष्ठिर॥
अस्त्रज्ञाने बले वीर्ये कार्तवीर्यसमोऽभवत्।
 
 
अनुवाद
हे पितामह युधिष्ठिर! भोज का राजकुमार कंस भी अस्त्र-शस्त्र, बल और पराक्रम के ज्ञान में महाबली अर्जुन के समान था।
 
Father Yudhishthira! Bhoja's prince Kansa was also equal to the great Arjuna in knowledge of weapons, strength and valour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)