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mahabharat 2.43.d49: उस पुत्र को आते देख सांदीपनि नगर के लोगों को विश्वास हो गया कि श्रीकृष्ण ने ऐसा कार्य कर दिखाया है जो अन्य सभी लोगों के लिए असंभव और अकल्पनीय है। भगवान नारायण के अलावा और कौन ऐसा अद्भुत कार्य सोच भी सकता है (करना तो दूर की बात है)।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d49
 
 
श्लोक  2.43.d49 
तं दृष्ट्वा पुत्रमायान्तं सान्दीपनिपुरे जना:।
अशक्यमेतत् सर्वेषामचिन्त्यमिति मेनिरे॥
कश्च नारायणादन्यश्चिन्तयेदिदमद्‍भुतम्।
 
 
अनुवाद
उस पुत्र को आते देख सांदीपनि नगर के लोगों को विश्वास हो गया कि श्रीकृष्ण ने ऐसा कार्य कर दिखाया है जो अन्य सभी लोगों के लिए असंभव और अकल्पनीय है। भगवान नारायण के अलावा और कौन ऐसा अद्भुत कार्य सोच भी सकता है (करना तो दूर की बात है)।
 
Seeing that son coming, the people of the city of Sandipani believed that Shri Krishna has accomplished such a task which is impossible and unthinkable for all other people. Who else other than Lord Narayana can even think of such a wonderful task (let alone doing it).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)