Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.43.d43: भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! ऐसा कहकर गुरु सांदीपनि अपने पुत्र के शोक से विह्वल हो गए। यद्यपि उनकी माँग अत्यन्त कठिन थी, तीनों लोकों में किसी अन्य पुरुष के लिए इस कार्य को पूरा करना असम्भव था, फिर भी श्रीकृष्ण ने उसे पूरा करने की प्रतिज्ञा की। | mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! ऐसा कहकर गुरु सांदीपनि अपने पुत्र के शोक से विह्वल हो गए। यद्यपि उनकी माँग अत्यन्त कठिन थी, तीनों लोकों में किसी अन्य पुरुष के लिए इस कार्य को पूरा करना असम्भव था, फिर भी श्रीकृष्ण ने उसे पूरा करने की प्रतिज्ञा की।
Bhishmaji says- Yudhishthir! Saying this, Guru Sandipani was overcome with grief for his son. Although his demand was very difficult, it was impossible for any other man in the three worlds to accomplish this task, yet Shri Krishna vowed to fulfill it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥