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mahabharat 2.43.d37: इतना ही नहीं, यदुवंश के उन पुत्रों ने उसी काल में लेख्य (चित्रकला), गणित, गंधर्ववेद तथा सभी वेदों की भी शिक्षा प्राप्त कर ली थी।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d37
 
 
श्लोक  2.43.d37 
लेख्यं च गणितं चोभौ प्राप्नुतां यदुनन्दनौ।
गान्धर्ववेदं वैद्यं च सकलं समवापतु:॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, यदुवंश के उन पुत्रों ने उसी काल में लेख्य (चित्रकला), गणित, गंधर्ववेद तथा सभी वेदों की भी शिक्षा प्राप्त कर ली थी।
 
Not only this, those sons of the Yaduvansh also learnt Lekhya (painting), Mathematics, Gandharva Veda and all the Vedas within the same period.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)