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mahabharat 2.43.d26: तत्पश्चात् प्राणियों के कल्याण की कामना से श्री कृष्ण ने बैल का रूप धारण कर अरिष्ट नामक राक्षस का शीघ्रतापूर्वक वध कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d26
 
 
श्लोक  2.43.d26 
अथारिष्ट इति ख्यातं दैत्यं वृषभविग्रहम्।
जघान तरसा कृष्ण: पशूनां हितकाम्यया॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् प्राणियों के कल्याण की कामना से श्री कृष्ण ने बैल का रूप धारण कर अरिष्ट नामक राक्षस का शीघ्रतापूर्वक वध कर दिया।
 
Thereafter, wishing for the welfare of the animals, Shri Krishna swiftly killed the demon named Arishta in the form of a bull.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)