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mahabharat 2.43.d23: शत्रुमर्दन युधिष्ठिर! (जब इंद्र वर्षा कर रहे थे) तब बालक वसुदेव ने गायों की रक्षा के लिए एक सप्ताह तक गोवर्धन पर्वत को अपने हाथ पर उठा रखा था।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d23
 
 
श्लोक  2.43.d23 
धृतो गोवर्धनो नाम सप्ताहं पर्वतस्तदा॥
शिशुना वासुदेवेन गवार्थमरिमर्दन।
 
 
अनुवाद
शत्रुमर्दन युधिष्ठिर! (जब इंद्र वर्षा कर रहे थे) तब बालक वसुदेव ने गायों की रक्षा के लिए एक सप्ताह तक गोवर्धन पर्वत को अपने हाथ पर उठा रखा था।
 
Shatrumardan Yudhishthir! (When Indra was raining) the child Vasudev had lifted the Govardhan mountain on his hand for a week to protect the cows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)