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mahabharat 2.43.d22: उन्हें देखकर सभी गोपगण भगवद्बुद्धि श्रीकृष्ण के उस रूप की पूजा करने लगे। गोपालों द्वारा पूजित भगवान श्रीकृष्ण ने दिव्य रूप धारण कर लिया।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d22
 
 
श्लोक  2.43.d22 
तं दृष्ट्वा गोपका: सर्वे कृष्णमेव समर्चयन्॥
पूज्यमानस्ततो गोपैर्दिव्यं वपुरधारयत्।
 
 
अनुवाद
उन्हें देखकर सभी गोपगण भगवद्बुद्धि श्रीकृष्ण के उस रूप की पूजा करने लगे। गोपालों द्वारा पूजित भगवान श्रीकृष्ण ने दिव्य रूप धारण कर लिया।
 
Seeing him, all the Gopas started worshiping that form of Bhagavadbuddhi Shri Krishna. Lord Krishna, worshiped by the Gopalas, assumed a divine form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)