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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d20
 
 
श्लोक  2.43.d20 
तौ देवौ मानुषीं दीक्षां वहन्तौ सुरपूजितौ।
तज्जातिगुणयुक्ताभि: क्रीडाभिश्चेरतुर्वनम्॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि वे दोनों पूज्य देवता थे, तथापि मनुष्य दीक्षा लेने के पश्चात् वे मानव जाति के अनुरूप गुणों से युक्त होकर वन में क्रीड़ा करते हुए विचरण करते थे।
 
Though both of them were revered deities, yet after having taken human initiation, they used to roam about in the forest playing sports with qualities befitting the human race.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)