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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  2.43.d2 
काकपक्षधर: श्रीमाञ्छॺाम: पद्मनिभेक्षण:।
श्रीवत्सेनोरसा युक्त: शशाङ्क इव लक्ष्मणा॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कौए के वस्त्र धारण कर रखे थे। वे अत्यंत सुंदर, श्याम वर्ण और कमल के समान सुंदर नेत्रों से सुशोभित थे। जैसे चंद्रमा कलंक से युक्त होने पर भी शोभायमान होता है, उसी प्रकार श्रीवत्स चिन्ह से युक्त श्रीकृष्ण का वक्षस्थल शोभायमान था।
 
He was wearing the crow's clothes. He was extremely handsome, dark-complexioned and was adorned with beautiful eyes like lotus. Just like the moon looks beautiful when it is stained with blemishes, in the same way Shri Krishna's chest was looking beautiful with the mark of Shrivatsa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)