Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.43.d17: कुन्तीनन्दन! उसके बाद किसी समय सुन्दर मुख वाले बलराम और श्रीकृष्ण अपने बड़े-बड़े गौवंश चराने के लिए वन में चले गये।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d17
 
 
श्लोक  2.43.d17 
तत: कदाचित् कौन्तेय रामकृष्णौ वनं गतौ।
चारयन्तौ प्रवृद्धानि गोधनानि शुभाननौ॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! उसके बाद किसी समय सुन्दर मुख वाले बलराम और श्रीकृष्ण अपने बड़े-बड़े गौवंश चराने के लिए वन में चले गये।
 
Kuntinandan! After that, at some time, the beautiful faced Balram and Shri Krishna went to the forest to graze their large cattle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)