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mahabharat 2.42.d38: कुन्तीनन्दन! तत्पश्चात् वे दोनों वसुदेव के पुत्र वृन्दावन में जाकर गौओं को चराने में आनन्द लेने लगे।   |   mahabharat अध्याय 2.42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन  »  श्लोक d38
 
 
श्लोक  2.42.d38 
ततो वृन्दावनं गत्वा वसुदेवसुतावुभौ।
गोव्रजं तत्र कौन्तेय चारयन्तौ विजह्रतु:॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! तत्पश्चात् वे दोनों वसुदेव के पुत्र वृन्दावन में जाकर गौओं को चराने में आनन्द लेने लगे।
 
Kuntinandan! Thereafter, both of them, sons of Vasudeva, went to Vrindavan and started having fun grazing the cows.
 
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)


 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)