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mahabharat 2.42.d12: वे शुभ वचनों से भगवान मधुसूदन की स्तुति करने लगे। भगवान के अवतार का समय जानकर महर्षि भी अत्यन्त प्रसन्न होकर वहाँ पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 2.42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन  »  श्लोक d12
 
 
श्लोक  2.42.d12 
गीर्भिर्मङ्गलयुक्ताभिरस्तुवन् मधुसूदनम्।
उपतस्थुस्तदा प्रीता: प्रादुर्भावे महर्षय:॥
 
 
अनुवाद
वे शुभ वचनों से भगवान मधुसूदन की स्तुति करने लगे। भगवान के अवतार का समय जानकर महर्षि भी अत्यन्त प्रसन्न होकर वहाँ पहुँचे।
 
He started praising Lord Madhusudan with auspicious words. Knowing the time of God's incarnation, the Maharishis also reached there very happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)