श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा  »  श्लोक d162-d164
 
 
श्लोक  2.40.d162-d164 
काश्मीरान् दरदान् कुन्तीन् क्षुद्रकान् मालवाञ्छकान्।
चेदिकाशिकरूषांश्च ऋषिकान् क्रथकैशिकान्॥
अङ्गान् वङ्गान् कलिङ्गांश्च मागधान् काशिकोसलान्।
रात्रायणान् वीतिहोत्रान् किरातान् मार्तिकावतान्॥
एतानन्यांश्च राजेन्द्रान् देशे देशे सहस्रश:।
निकृत्त्य निशितैर्बाणै: सम्प्रदाय विवस्वते॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कश्मीर, दरद, कुन्तीभोज, क्षुद्रक, मालव, शक, चेदि, काशी, करुष, ऋषिक, क्रथ, कैशिक, अंग, वंग, कलिंग, मगध, काशी, कोशल, रातरायण, वीतिहोत्र, किरात और मार्तिकावत - तथा प्रत्येक देश के हजारों राजाओं को तीखे बाणों से मार डाला और यमराज के सामने प्रस्तुत कर दिया।
 
He killed Kashmir, Dard, Kunti Bhoja, Kshudraka, Malava, Shaka, Chedi, Kashi, Karusha, Rishika, Kratha, Kaishika, Ang, Vanga, Kalinga, Magadha, Kashi, Kosala, Ratrayana, Vitihotra, Kirata and Martikavat - and thousands of other kings in every country - with sharp arrows and presented them to Yamaraja.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)