Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.4.24-33h: इनके अलावा जटासुर, मद्रराज शल्य, राजा कुन्तिभोज, किरातराज पुलिंद, अंगराज, वंगराज, पुंड्रक, पांडव, उद्रराज, आंध्रनरेश, अंग, वंग, सुमित्र, शत्रुसूदन शैब्य, किरातराज सुमना, यवन्नारेश, चाणूर, देवरात, भोज, भीमरथ, कलिंगराज श्रुतायुध, मगध मूल निवासी जयसेन, सुकर्मा, चेकितान, शत्रुनाशक पुरु, केतुमान, वसुदान, विदेहराज कृतक्षण, सुधर्मा, अनिरुद्ध, पराक्रमी श्रुतायु, दुर्धर्ष वीर अनुपराज, क्रमजीत, सुदर्शन, शिशुपाल अपने पुत्र के साथ, करुषराज दन्तवक्त्र, दुर्धर्ष राजकुमार जो वृष्णि वंश के देवता हैं, अहुक, विपृथु, गद, सारण, अक्रूर, कृतवर्मा, शिनिपुत्र। सत्यक, भीष्मक, आकृति, महाबली द्युमत्सेन, महाधनुर्धर केकयराजकुमार, सोमक के पौत्र द्रुपद, केतुमान (द्वितीय) तथा शस्त्रविद्या में निपुण महाबली वसुमान - ये तथा अन्य अनेक प्रमुख क्षत्रिय उस सभा में कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर की सेवा में बैठते थे। | mahabharat अध्याय 2.4: मयद्वारा निर्मित सभाभवनमें धर्मराज युधिष्ठिरका प्रवेश तथा सभामें स्थित महर्षियों और राजाओं आदिका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इनके अलावा जटासुर, मद्रराज शल्य, राजा कुन्तिभोज, किरातराज पुलिंद, अंगराज, वंगराज, पुंड्रक, पांडव, उद्रराज, आंध्रनरेश, अंग, वंग, सुमित्र, शत्रुसूदन शैब्य, किरातराज सुमना, यवन्नारेश, चाणूर, देवरात, भोज, भीमरथ, कलिंगराज श्रुतायुध, मगध मूल निवासी जयसेन, सुकर्मा, चेकितान, शत्रुनाशक पुरु, केतुमान, वसुदान, विदेहराज कृतक्षण, सुधर्मा, अनिरुद्ध, पराक्रमी श्रुतायु, दुर्धर्ष वीर अनुपराज, क्रमजीत, सुदर्शन, शिशुपाल अपने पुत्र के साथ, करुषराज दन्तवक्त्र, दुर्धर्ष राजकुमार जो वृष्णि वंश के देवता हैं, अहुक, विपृथु, गद, सारण, अक्रूर, कृतवर्मा, शिनिपुत्र। सत्यक, भीष्मक, आकृति, महाबली द्युमत्सेन, महाधनुर्धर केकयराजकुमार, सोमक के पौत्र द्रुपद, केतुमान (द्वितीय) तथा शस्त्रविद्या में निपुण महाबली वसुमान - ये तथा अन्य अनेक प्रमुख क्षत्रिय उस सभा में कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर की सेवा में बैठते थे।
Apart from these, Jatasur, Madraraj Shalya, King Kuntibhoja, Kiratraj Pulinda, Angraj, Vangraj, Pundrak, Pandav, Udraraj, Andhranaresh, Anga, Vang, Sumitra, Shatrusudan Shaibya, Kiratraj Sumana, Yavannaresh, Chanur, Devarat, Bhoj, Bhimrath, Kalingaraj Shrutayudh, Magadha native Jaysen, Sukarma, Chekitana, enemy destroyer Puru, Ketuman, Vasudan, Videharaja Kritakshan, Sudharma, Aniruddha, mighty Shrutayu, Durdharsh brave Anupraj, Kramjit, Sudarshan, Shishupala with his son, Karushraj Dantavaktra, Durdharsh prince who is the deity of Vrishni dynasty, Ahuk, Viprithu, Gad, Saran, Akrur, Kritavarma, Shiniputra. Satyak, Bhishmak, Aakriti, Mighty Dyumatsena, the great archer Kekayarajkumar, Somak's grandson Drupada, Ketuman (II) and the mighty Vasuman, adept in the art of weapons - these and many other prominent Kshatriyas used to sit in that assembly in the service of Kuntinandan Yudhishthira. 24-32 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥