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mahabharat 2.39.d47-d49: उन दोनों को आते देख महाबली लोकनाथ भगवान पद्मनाभ अपनी शय्या से उठ खड़े हुए। उनके नेत्र क्रोध से लाल हो गए। फिर उन्होंने उनके साथ घोर युद्ध किया। उस भयानक समुद्र में जहाँ त्रिलोकी जल-जल हो गई थी, हजारों वर्षों तक उनका घोर युद्ध चलता रहा; किन्तु उस समय वे दोनों राक्षस उस युद्ध में तनिक भी नहीं थके।   |   mahabharat अध्याय 2.39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध  »  श्लोक d47-d49
 
 
श्लोक  2.39.d47-d49 
तौ दृष्ट्वा लोकनाथस्तु कोपात् संरक्तलोचन:।
उत्पपाताथ शयनात् पद्मनाभो महाद्युति:॥
तद् युद्धमभवद् घोरं तयोस्तस्य च वै तदा।
एकार्णवे तदा घोरे त्रैलोक्ये जलतां गते॥
तदभूत् तुमुलं युद्धं वर्षसङ्घान् सहस्रश:।
न च तावसुरौ युद्धे तदा श्रममवापतु:॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों को आते देख महाबली लोकनाथ भगवान पद्मनाभ अपनी शय्या से उठ खड़े हुए। उनके नेत्र क्रोध से लाल हो गए। फिर उन्होंने उनके साथ घोर युद्ध किया। उस भयानक समुद्र में जहाँ त्रिलोकी जल-जल हो गई थी, हजारों वर्षों तक उनका घोर युद्ध चलता रहा; किन्तु उस समय वे दोनों राक्षस उस युद्ध में तनिक भी नहीं थके।
 
Seeing them both coming, the mighty Loknath Lord Padmanabh stood up from his bed. His eyes became red with anger. Then he fought a fierce battle with them. In that terrible ocean where Triloki had become water, their fierce battle continued for thousands of years; but at that time, those two demons did not get tired at all in that battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)