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mahabharat 2.38.6: भीष्म बोले - धर्मराज! भगवान श्रीकृष्ण समस्त ब्रह्माण्ड में सर्वश्रेष्ठ हैं। वे सर्वाधिक पूजनीय हैं। जो उनकी पूजा को पहले स्वीकार न करे, उसे मनाना नहीं चाहिए। वह समझाने-बुझाने के भी योग्य नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 2.38: युधिष्ठिरका शिशुपालको समझाना और भीष्मजीका उसके आक्षेपोंका उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 38: युधिष्ठिरका शिशुपालको समझाना और भीष्मजीका उसके आक्षेपोंका उत्तर देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.38.6 
भीष्म उवाच
नास्मै देयो ह्यनुनयो नायमर्हति सान्त्वनम्।
लोकवृद्धतमे कृष्णे योऽर्हणां नाभिमन्यते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - धर्मराज! भगवान श्रीकृष्ण समस्त ब्रह्माण्ड में सर्वश्रेष्ठ हैं। वे सर्वाधिक पूजनीय हैं। जो उनकी पूजा को पहले स्वीकार न करे, उसे मनाना नहीं चाहिए। वह समझाने-बुझाने के भी योग्य नहीं है।
 
Bhishma said - Dharamraj! Lord Krishna is the greatest in the entire universe. He is the most worship-worthy. One who does not accept his worship first should not be coaxed. He is not even worthy of being consoled or explained.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)