श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 38: युधिष्ठिरका शिशुपालको समझाना और भीष्मजीका उसके आक्षेपोंका उत्तर देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.38.5 
वेद तत्त्वेन कृष्णं हि भीष्मश्चेदिपते भृशम्।
न ह्येनं त्वं तथा वेत्थ यथैनं वेद कौरव:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'चेदिराज! भगवान श्रीकृष्ण को तो हमारे पितामह भीष्मजी ही यथार्थ रूप से जानते हैं। उनके तत्त्व का ज्ञान कुरुनंदन भीष्मजी को है, वैसा तुम्हें नहीं है। 5॥
 
'Chediraj! Only our grandfather Bhishmaji knows Lord Shri Krishna truly. You do not have the knowledge of his Tattva that Kurunandan Bhishmaji has. 5॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd