श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 38: युधिष्ठिरका शिशुपालको समझाना और भीष्मजीका उसके आक्षेपोंका उत्तर देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.38.23 
कृष्ण एव हि लोकानामुत्पत्तिरपि चाप्यय:।
कृष्णस्य हि कृते विश्वमिदं भूतं चराचरम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण सम्पूर्ण जगत् की उत्पत्ति और संहार के स्थान हैं। यह सम्पूर्ण चराचर जगत् उन्हीं के लिए प्रकट हुआ है॥ 23॥
 
Lord Shri Krishna is the place of origin and destruction of the entire universe. This entire animate and inanimate universe has appeared for Him.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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