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श्लोक 2.38.23  |
कृष्ण एव हि लोकानामुत्पत्तिरपि चाप्यय:।
कृष्णस्य हि कृते विश्वमिदं भूतं चराचरम्॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान श्रीकृष्ण सम्पूर्ण जगत् की उत्पत्ति और संहार के स्थान हैं। यह सम्पूर्ण चराचर जगत् उन्हीं के लिए प्रकट हुआ है॥ 23॥ |
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| Lord Shri Krishna is the place of origin and destruction of the entire universe. This entire animate and inanimate universe has appeared for Him.॥ 23॥ |
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