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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 37: शिशुपालके आक्षेपपूर्ण वचन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.37.31 
इत्युक्त्वा शिशुपालस्तानुत्थाय परमासनात्।
निर्ययौ सदसस्तस्मात् सहितो राजभिस्तदा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर शिशुपाल अपने आसन से उठ खड़ा हुआ और कुछ राजाओं के साथ सभा भवन से बाहर जाने के लिए तैयार हो गया।
 
Having said this to them, Sisupala got up from his best seat and prepared to leave the assembly hall along with some kings.
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि अर्घाभिहरणपर्वणि शिशुपालक्रोधे सप्तत्रिंशोऽध्याय:॥ ३७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत अर्घाभिहरणपर्वमें शिशुपालका क्रोधविषयक सैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)