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mahabharat 2.31.d65: उन्होंने खांडव वन को जलाकर अग्निदेव को संतुष्ट किया। उन्होंने देवताओं सहित इंद्र को भी महाबल से परास्त करके अग्निदेव को संतुष्ट किया और उनसे दिव्यास्त्र प्राप्त किए।   |   mahabharat अध्याय 2.31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक d65
 
 
श्लोक  2.31.d65 
तेन तत् खाण्डवं दावं तर्पितं जातवेदसे।
तरसा धर्षयित्वा तं शक्रं देवगणै: सह॥
लब्धान्यस्त्राणि दिव्यानि तर्पयित्वा हुताशनम्।
 
 
अनुवाद
उन्होंने खांडव वन को जलाकर अग्निदेव को संतुष्ट किया। उन्होंने देवताओं सहित इंद्र को भी महाबल से परास्त करके अग्निदेव को संतुष्ट किया और उनसे दिव्यास्त्र प्राप्त किए।
 
He satisfied Agnidev by burning the Khandava forest. He satisfied Agnidev by defeating Indra along with the gods with great force and obtained divine weapons from him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)