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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.31.27 
वैशम्पायन उवाच
तत्र माहिष्मतीवासी भगवान् हव्यवाहन:।
श्रूयते हि गृहीतो वै पुरस्तात् पारदारिक:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, 'हे जनमेजय! ऐसा सुना गया है कि एक बार महिष्मती नगरी में निवास करने वाले भगवान अग्निदेव नील राजा की पुत्री सुदर्शना पर मोहित हो गए।
 
Vaishmpayana said, 'O Janamejaya! It has been heard that once Lord Agni, who resides in the city of Mahishmati, became attracted to Sudarshana, the daughter of the Neel king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)