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mahabharat 2.31.25: जनमेजय! इससे कुरुनन्दन सहदेव के मन में बड़ी घबराहट उत्पन्न हो गई। वे उसका प्रतीक करने में असमर्थ हो गए ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 2.31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.31.25 
तत: सुसम्भ्रान्तमना बभूव कुरुनन्दन:।
नोत्तरं प्रतिवक्तुं च शक्तोऽभूज्जनमेजय॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! इससे कुरुनन्दन सहदेव के मन में बड़ी घबराहट उत्पन्न हो गई। वे उसका प्रतीक करने में असमर्थ हो गए ॥25॥
 
Janamejaya! This caused great panic in the mind of Kurunandan Sahadev. They became unable to symbolize it. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)