श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.3.37 
ईदृशीं तां सभां कृत्वा मासै: परिचतुर्दशै:।
निष्ठितां धर्मराजाय मयो राजन् न्यवेदयत्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
मयासुर ने पूरे चौदह महीने में इतना अद्भुत सभाभवन बनवाया था। हे राजन! जब वह बनकर तैयार हो गया, तो उसने धर्मराज को इसकी सूचना दी।
 
Mayasura had constructed such a wonderful assembly hall in full fourteen months. O King! When it was ready, he informed Dharmaraj about this.
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि सभाक्रियापर्वणि सभानिर्माणे तृतीयोऽध्याय:॥ ३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत सभाक्रियापर्वमें सभानिर्माणविषयक तीसरा अध्याय पूरा हुआ॥ ३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३८ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)