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श्लोक  2.3.22 
यस्य शङ्खस्य नादेन भूतानि प्रचकम्पिरे।
सभा च सा महाराज शातकुम्भमयद्रुमा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उस शंख की ध्वनि सुनकर सभी प्राणी काँप उठे। महाराज! उस सभा में स्वर्णमय वृक्ष शोभायमान थे।
 
All creatures trembled on hearing the sound of that conch. Maharaj! Golden trees looked beautiful in that assembly. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)