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mahabharat 2.3.15: एक हजार युग बीत जाने पर नर-नारायण, ब्रह्मा, यमराज और पाँचवें महादेवजी ऋषि वहाँ यज्ञ करते हैं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 2.3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.3.15 
नरनारायणौ ब्रह्मा यम: स्थाणुश्च पञ्चम:।
उपासते यत्र सत्रं सहस्रयुगपर्यये॥ १५॥
 
 
अनुवाद
एक हजार युग बीत जाने पर नर-नारायण, ब्रह्मा, यमराज और पाँचवें महादेवजी ऋषि वहाँ यज्ञ करते हैं॥15॥
 
After the passage of one thousand yugas, the sages Nara-Narayana, Brahma, Yamaraja and the fifth Mahadevji perform the yajna there.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)