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mahabharat 2.28.d54: इस प्रकार बातें करते हुए स्त्रियाँ बड़े प्रेम से अर्जुन को देखती रहीं, उसकी स्तुति गाती रहीं और उसके सिर पर पुष्प वर्षा करती रहीं।   |   mahabharat अध्याय 2.28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना  »  श्लोक d54
 
 
श्लोक  2.28.d54 
इति वाचो ब्रुवन्त्यस्ता: स्त्रिय: प्रेम्णा धनंजयम्॥
तुष्टुवु: पुष्पवृष्टिं च ससृजुस्तस्य मूर्धनि।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बातें करते हुए स्त्रियाँ बड़े प्रेम से अर्जुन को देखती रहीं, उसकी स्तुति गाती रहीं और उसके सिर पर पुष्प वर्षा करती रहीं।
 
While talking in this manner, the women looked at Arjun with great love, sang his praises and showered flowers on his head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)