Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.28.d24: सुनहरे पंखों वाले पक्षी उसमें रमते थे। वह नदी सुनहरे कमलों से भरी थी। उसकी कीचड़ भी सुनहरी थी। उसके पानी में भी सुनहरी चमक थी। उस पावन नदी की रेत भी सुनहरे चूर्ण जैसी दिखती थी। | mahabharat अध्याय 2.28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुनहरे पंखों वाले पक्षी उसमें रमते थे। वह नदी सुनहरे कमलों से भरी थी। उसकी कीचड़ भी सुनहरी थी। उसके पानी में भी सुनहरी चमक थी। उस पावन नदी की रेत भी सुनहरे चूर्ण जैसी दिखती थी।
Birds with golden wings used to enjoy it. That river was full of golden lotuses. Its mud was also golden. Its water also had a golden glow. The sand of that auspicious river also looked like golden powder.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥