श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.28.13 
अथेह पुरुषव्याघ्र किंचिदन्यच्चिकीर्षसि।
तत् प्रब्रूहि करिष्यामो वचनात् तव भारत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
"भरतकुलभूषण पुरुषसिंह! यदि आप यहाँ युद्ध के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य करना चाहते हैं, तो हमें बताइए। आपकी इच्छानुसार हम स्वयं ही वह कार्य कर लेंगे।" ॥13॥
 
"Bharatkulbhushan Purushsingh! If you want to do some other work here apart from fighting, then tell us. We will do that work ourselves as per your wish." ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)