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mahabharat 2.24.8-9: जब जरासंध को रगड़ा जा रहा था और पाण्डुपुत्र गर्जना करके उसे पीस रहे थे, तब भीमसेन की गर्जना और जरासंध की चीख से उत्पन्न कोलाहलपूर्ण ध्वनि समस्त प्राणियों को भयभीत कर रही थी। उसे सुनकर मगध के सभी निवासी भय से काँप उठे। यहाँ तक कि स्त्रियाँ भी गर्भपात का शिकार हो गईं।   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  2.24.8-9 
तस्य निष्पिष्यमाणस्य पाण्डवस्य च गर्जत:।
अभवत् तुमुलो नाद: सर्वप्राणिभयंकर:॥ ८॥
वित्रेसुर्मागधा: सर्वे स्त्रीणां गर्भाश्च सुस्रुवु:।
भीमसेनस्य नादेन जरासंधस्य चैव ह॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जब जरासंध को रगड़ा जा रहा था और पाण्डुपुत्र गर्जना करके उसे पीस रहे थे, तब भीमसेन की गर्जना और जरासंध की चीख से उत्पन्न कोलाहलपूर्ण ध्वनि समस्त प्राणियों को भयभीत कर रही थी। उसे सुनकर मगध के सभी निवासी भय से काँप उठे। यहाँ तक कि स्त्रियाँ भी गर्भपात का शिकार हो गईं।
 
When Jarasandha was being rubbed and the sons of Pandu were roaring and grinding him, the tumultuous sound created by Bhimasena's roar and Jarasandha's screams was frightening to all living beings. Hearing it, all the residents of Magadh trembled with fear. Even the women miscarried. 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)