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mahabharat 2.24.58-59: भारत! महान विजय प्राप्त करके और जरासन्ध द्वारा बन्दी बनाए गए राजाओं को संरक्षण देकर जब देवकीपुत्र भगवान श्रीकृष्ण चले गए, तब उपर्युक्त कर्मों के कारण पाण्डवों की कीर्ति बहुत बढ़ गई और वे पाण्डव भी द्रौपदी के प्रति प्रेम बढ़ाने लगे॥58-59॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 58-59
 
 
श्लोक  2.24.58-59 
ततो गते भगवति कृष्णे देवकिनन्दने।
जयं लब्ध्वा सुविपुलं राज्ञां दत्त्वाभयं तदा॥ ५८॥
संवर्धितं यशो भूय: कर्मणा तेन भारत।
द्रौपद्या: पाण्डवा राजन् परां प्रीतिमवर्धयन्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
भारत! महान विजय प्राप्त करके और जरासन्ध द्वारा बन्दी बनाए गए राजाओं को संरक्षण देकर जब देवकीपुत्र भगवान श्रीकृष्ण चले गए, तब उपर्युक्त कर्मों के कारण पाण्डवों की कीर्ति बहुत बढ़ गई और वे पाण्डव भी द्रौपदी के प्रति प्रेम बढ़ाने लगे॥58-59॥
 
Bhaarat! After achieving a great victory and giving protection to those kings who had been imprisoned by Jarasandha, when Lord Krishna, the son of Devaki, left, the fame of the Pandavas increased a lot due to the above mentioned deeds and those Pandavas also started increasing the love of Draupadi. ॥ 58-59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)