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mahabharat 2.24.5: उसके संकेत पर शत्रुओं का दमन करने वाले महाबली भीम ने बलवान जरासन्ध को उठाकर उसे शीघ्रतापूर्वक आकाश में घुमाना आरम्भ कर दिया॥5॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.24.5 
एवमुक्तस्तदा भीमो जरासंधमरिंदम:।
उत्क्षिप्य भ्रामयामास बलवन्तं महाबल:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उसके संकेत पर शत्रुओं का दमन करने वाले महाबली भीम ने बलवान जरासन्ध को उठाकर उसे शीघ्रतापूर्वक आकाश में घुमाना आरम्भ कर दिया॥5॥
 
At his signal, the mighty Bhima, the subduer of enemies, picked up the powerful Jarasandha and began to whirl him rapidly in the sky. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)