Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.24.45: और उत्तम सुन्दरता से विभूषित पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण प्रचुर रत्नों का दान लेकर दोनों कुन्तीकुमारों के साथ वहाँ से चले गए॥45॥   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.24.45 
कृष्णस्तु सह पार्थाभ्यां श्रिया परमया युत:।
रत्नान्यादाय भूरीणि प्रययौ पुरुषर्षभ:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
और उत्तम सुन्दरता से विभूषित पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण प्रचुर रत्नों का दान लेकर दोनों कुन्तीकुमारों के साथ वहाँ से चले गए॥45॥
 
And Purushottam Shri Krishna, adorned with the best beauty, took the gift of abundant gems and left from there along with the two Kuntikumars. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)