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mahabharat 2.24.33: हे प्रभु! हम सभी राजा जरासंध के उस भयंकर गर्त में डूब रहे थे, जो दुःख के कीचड़ से भरा हुआ था। आज आपने जिस प्रकार हमारी रक्षा की है, वह आपके योग्य है।   |   mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.24.33 
जरासंधह्रदे घोरे दु:खपङ्के निमज्जताम्।
राज्ञां समभ्युद्धरणं यदिदं कृतमद्य वै॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हम सभी राजा जरासंध के उस भयंकर गर्त में डूब रहे थे, जो दुःख के कीचड़ से भरा हुआ था। आज आपने जिस प्रकार हमारी रक्षा की है, वह आपके योग्य है।
 
'O Lord! All of us kings were drowning in the dreadful pit of Jarasandha, which was filled with the mud of sorrow. The way you have saved us today is worthy of you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)