Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.20.3: मुझमें बुद्धि है, भीमसेन में बल है और अर्जुन हम दोनों का रक्षक है; अतः जैसे तीन अग्नि मिलकर यज्ञ को सफल बनाती हैं, वैसे ही हम तीनों मिलकर जरासंध के वध का कार्य पूर्ण करेंगे॥3॥   |   mahabharat अध्याय 2.20: युधिष्ठिरके अनुमोदन करनेपर श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनकी मगध-यात्रा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 20: युधिष्ठिरके अनुमोदन करनेपर श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेनकी मगध-यात्रा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.20.3 
मयि नीतिर्बलं भीमे रक्षिता चावयोर्जय:।
मागधं साधयिष्याम इष्टिं त्रय इवाग्नय:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मुझमें बुद्धि है, भीमसेन में बल है और अर्जुन हम दोनों का रक्षक है; अतः जैसे तीन अग्नि मिलकर यज्ञ को सफल बनाती हैं, वैसे ही हम तीनों मिलकर जरासंध के वध का कार्य पूर्ण करेंगे॥3॥
 
I have wisdom, Bhimasena has strength and Arjuna is the protector of both of us; therefore, just as three fires make a sacrifice successful, in the same way the three of us together will accomplish the task of killing Jarasandha.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)