Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.19.27: हे जनमेजय! मैं तुम्हें उन दो महारथियों का परिचय पहले ही दे चुका हूँ। मेरा मानना है कि जरासंध और वे तीनों मिलकर तीनों लोकों का सामना करने के लिए पर्याप्त थे। | mahabharat अध्याय 2.19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यौ तौ मया ते कथितौ पूर्वमेव महाबलौ।
त्रयस्त्रयाणां लोकानां पर्याप्ता इति मे मति:॥ २७॥
अनुवाद
हे जनमेजय! मैं तुम्हें उन दो महारथियों का परिचय पहले ही दे चुका हूँ। मेरा मानना है कि जरासंध और वे तीनों मिलकर तीनों लोकों का सामना करने के लिए पर्याप्त थे।
O Janamejaya! I have already given you the introduction of those two mighty warriors. I believe that Jarasandha and those three together were enough to face the three worlds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥