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mahabharat 2.19.13: 'यह महाबली राजकुमार चारों वर्णों को उसी प्रकार अपने में समाहित कर लेगा, जैसे सब प्रकार के अन्नों को धारण करने वाली यह समृद्ध पृथ्वी, सब अच्छे-बुरे प्राणियों को आश्रय देती है।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 2.19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 19: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.19.13 
एष धारयिता सम्यक् चातुर्वर्ण्यं महाबल:।
शुभाशुभमिव स्फीता सर्वसस्यधरा धरा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'यह महाबली राजकुमार चारों वर्णों को उसी प्रकार अपने में समाहित कर लेगा, जैसे सब प्रकार के अन्नों को धारण करने वाली यह समृद्ध पृथ्वी, सब अच्छे-बुरे प्राणियों को आश्रय देती है।॥13॥
 
'This mighty prince will embrace all the four castes (castes) just as the prosperous earth, which bears all kinds of grains, shelters all the good and the bad.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)