श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.17.8 
अनवद्या ह्यसम्बुद्धा: प्रविष्टा: शत्रुसद्म तत्।
शत्रुदेहमुपाक्रम्य तं कामं प्राप्नुयामहे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यदि हम शत्रु के घर तक चुपके से पहुँच जाएँ, तो हमारे लिए कोई अपमान की बात नहीं होगी। फिर हम शत्रु के शरीर पर आक्रमण करके अपना कार्य सिद्ध कर लेंगे ॥8॥
 
If we reach the enemy's house stealthily, it will not be a matter of any disgrace for us. Then we will attack the enemy's body and accomplish our task. ॥ 8॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd