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mahabharat 2.17.37: उनके हृदय चिंता से भर गए; वे असहाय स्त्रियाँ थीं। दोनों बहनें बहुत दुखी हुईं और आपस में सलाह-मशविरा करने के बाद, उन्होंने कपड़े के उन दो टुकड़ों को त्याग दिया जिनमें अभी भी प्राण और जान थी।   |   mahabharat अध्याय 2.17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 17: श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी बातका अनुमोदन तथा युधिष्ठिरको जरासंधकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.17.37 
उद्विग्ने सह सम्मन्त्र्य ते भगिन्यौ तदाबले।
सजीवे प्राणिशकले तत्यजाते सुदु:खिते॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उनके हृदय चिंता से भर गए; वे असहाय स्त्रियाँ थीं। दोनों बहनें बहुत दुखी हुईं और आपस में सलाह-मशविरा करने के बाद, उन्होंने कपड़े के उन दो टुकड़ों को त्याग दिया जिनमें अभी भी प्राण और जान थी।
 
Their hearts were filled with anxiety; they were helpless women. The two sisters were very sad and after consulting each other, abandoned the two pieces of cloth which still had life and soul in them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)